अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे समझे - सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी

क्या आपने कभी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को देखा और यह सोचने पर मजबूर हुए, आखिर आप देख क्या रहे हैं ? अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे समझे...? Ultrasound in hindi


जब दूसरे लोग सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट) पढ़कर तरह-तरह की बातें कर रहे होते हैं ओवरिन डायग्नोसिस, गर्भाशयशोथ ट्रीटमेंट लेकिन अभी भी आप यह निर्णय कर पाने में असमर्थ है कि क्या, क्या है?


देखिए…, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट) में अगर आपको सबकुछ काला-काला ही दिखता है तो चलिए बेसिक से समझते हैं जिससे आपको एक समझ मिल सके आखिर आप देख क्या रहे हैं सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी




अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे समझे | सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी - Ultrasound report kaise samjhe

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अल्ट्रासाउंड एक non invasive test हैं ये एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से शरीर अन्दर मौजूद अंगों व कोशिकाओं के इमेजेस बिना चिर - फाड़ के ही लिए जा सकते हैं। अल्ट्रासाउंड में ध्वनी तरंगों का उपयोग इमेजेस बनाने के लिए किया जाता हैं। 


अल्ट्रासाउंड की सबसे अच्छी बात ये है यह एक्स-रे की तरह हड्डियों के पार नहीं जाता। लेकिन सोनोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने के लिए आपको उसकी anatomy को समझना होगा। 


शरीर में मौजूद हर एक कोशिका एक अलग फ्रीक्वेंसी की ध्वनी उत्पन्न करती हैं। कुछ अंग ध्वनि तरंगों को अवशोषित कर लेती है तो कुछ उन्हें रिफ्लेक्ट कर देती हैं। कोशिकाओं का घनत्व उस गति को निर्धारित करता जिससे गूंज वापस आती है।


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सोनोग्राफी रिपोर्ट में काले रंग का दिखाई देने वाला हिस्सा फ्लूइड या हवा के कारण बनता हैं। ग्रे कलर में दिखने वाले अंग कोशिकाए रहती हैं यहां कोशिकाएं जितने सघन होंगे वे उतने चमकीले (सफेद) अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में दिखते हैं तथा जो सबसे ज्यादा सफेद नजर आता हैं वह हड्डियां होती है।


शायद अब..., जब आप सोनोग्राफी रिपोर्ट देखेंगे तो यह समझ जाएंगे आखिर आप देख क्या रहे थे…! यानी अल्ट्रासाउंड image में क्या दिखाई दे रहा हैं।


बेहतर ultrasound image के लिए बेहतर equipments का होना भी उतना ही जरुरी होता है। तभी चीजे साफ नजर आएंगी। तभी आप सोनोग्राफी रिपोर्ट सही से पढ़ पाएंगे। 


लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड किए जाने के भी कुछ प्रकार होते हैं...




अल्ट्रासाउंड के प्रकार | types of ultrasound | ultrasound report kaise padhe in hindi



बाहरी अल्ट्रासाउंड 

बाहरी अल्ट्रासाउंड, जैसा कि नाम से स्पष्ट होता हैं इसमें एक ट्रांसड्यूसर (हाथ में पकड़े जाने वाला एक छोटा सा उपकरण) त्वचा पर रखकर शरीर के उस हिस्से पर घुमाया जाता हैं जिसकी जांच होनी होती है। बाहरी अल्ट्रासाउंड का उपयोग मुख्यत: गर्भ में पल रहे बच्चे या फिर मानव दिल की जांच के लिए किया जाता है।



आंतरिक अल्ट्रासाउंड

अंदरूनी जांच के लिए आंतरिक अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग किया जाता हैं। इसमें अल्ट्रासाउंड प्रोब को शरीर के अन्दर ले जाया जाता है प्रोस्टेट ग्लैंड, अंडाशय या गर्भाशय की जांच इस विधि से कर बेहतर परिणाम निकाले जाते हैं। 


 

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाऊंड

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाऊंड जांच में एक लंबी पतली और लचीली ट्यूब जिसे एंडोस्कोप कहते है मुंह के जरिए ग्रास नली, पेट, लसिका ग्रंथि (lymph node) जैसे अंगों की जांच की जाती है



आईए जानते हैं एक सोनोग्राफी रिपोर्ट को पढ़ने के लिए आपको उसमें क्या क्या देखना चाहिए और सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे देखना चाहिए….




इमेज को ऊपर से देखना शुरू करें - sonography in hindi


वैसे तो ultrasound image के ऊपर दिए नम्बरो पर आपको ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्युकी इनमें हॉस्पिटल या लैब अपनी जानकारी के लिए इंफॉर्मेशन लिखते है।


आपको वहां से शुरू करना चाहिए जहां से इमेज बनना शुरू हुआ है। यहीं आपको बताता है कि अल्ट्रासाऊंड (sonography test) आपके किस बॉडी पार्ट का और कितने हिस्से का लिया गया है।




अल्ट्रासाऊंड बॉडी साइड स्कैनिंग - usg test in hindi


अधिकांश अल्ट्रासाऊंड स्कैनिंग को मिररड रखा जाता है यानी शरीर का लेफ्ट वाला हिस्सा इमेज के लेफ्ट साइड में ही दिखेगा। इसलिए आपका लेफ्ट साइड वाला हिस्सा अल्ट्रासाऊंड इमेज में भी आपको लेफ्ट साइड में ही दिखेगा।


हालांकि, बहुत से transvaginal अल्ट्रासाउंड स्ट्रेट शॉट में लिए जाते हैं यानी लेफ्ट साइड की इमेज राइट साइड में दिखेगी, इसके बारे में आप अपने अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।



विजुअल इफेक्ट्स इन सोनोग्राफी - sonography in hindi


अल्ट्रासोनोग्राफी आंतरिक अंगों की इमेजेस बनाने के लिए ध्वनी तरंगों (sound waves) का प्रयोग करता हैं इसलिए ज्यादातर इमेज साफ नहीं रहतीं, सोनोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने के लिए आपको इसमें होने वाले कुछ इफेक्ट्स को भी समझना होगा।


क्युकी अलग अलग विजुअल इफेक्ट्स अल्ट्रासाऊंड की सेटिंग, एंगल, और टिशूज की डेंसिटी से भी आते है



एन्हांसमेंट (Enhancment) : जब शरीर में एक्स्ट्रा फ्लूइड की वजह से बॉडी का कोई हिस्सा ज्यादा ब्राइट नजर आने लगे तो इसे एन्हांसमेंट कहते है जैसे - किसी गांठ या cyst में


एटेन्युएशन (attenuation) : इसे शेडोइंग (shadowing) भी कहते हैं ये तब होता हैै जब स्कैन किए जाने वाला एरिया जरूरत सेे ज्यााद डार्क नजर आने लगे। 


अनिसोट्रोपी (anisotropy) : इस तरह के इफेक्ट प्रोब एंगल की वजह से बनते हैं उदाहरण के लिए यदि किसी प्रोब को टेंडन के 90° पर रखें, तो इमेज बहुत ब्राइट नजर आने लगता है। इसलिए इस तरह के इफेक्ट को रोकने के लिए एंगल एडजस्ट करना पड़ता हैं।




अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय की खोज करें | sonography in hindi


यदि प्रेग्नेंसी में आप ultrasonography करवाते हैं यहां अल्ट्रासाउंड इमेज के किनारे पर आपको सफेद या ग्रे रंग की एक आउटलाइन दिखेगी, जो गर्भाशय होता हैं। गर्भाशय के बीच वाला हिस्सा एमनियोटिक फ्लूइड की मौजूदगी से काला नजर आता हैं।


अगर अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन ने प्रोब को इस प्रकार से सेट किया है कि बच्चा इमेज के बीच में दिखें तो हो सकता है गर्भाशय की व्हाईट या ग्रे आउटलाइन इमेज के केवल एक या दो ही साइड में दिखाई पड़े



अल्ट्रासाउंड इमेज में शिशु को कैसे खोजें - sonography in hindi


अल्ट्रासाउंड इमेज में शिशु एमनियोटिक फ्लूइड (काले हिस्से) के बीच में व्हाईट या ग्रे आउटलाइन में दिखाई देता हैं, हालांकि, यदि आप शिशु के आउटलाइन को सही से नहीं ढूंढ़ पा रहीं होंगी तो इसका एक कारण ये हो सकता है कि आप अभी प्रेगनेंसी के शुरुआती स्टेज में हैं


क्युकी प्रेग्नेंसी के अलग अलग स्टेजेस में शिशु अलग दिखाई देता हैं जैसे - 8 हफ्तों के बाद छोटे भालू के समान, 12 हफ्तों के बाद शिशु का सिर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगाता है। 20 सप्ताह तक लगभग सभी अंग बनकर दिखने लगते है।




अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बॉय और गर्ल जेंडर कैसे पता करें - ultrasound in hindi


वैसे तो सोनोग्राफी रिपोर्ट देखकर जेंडर बता पाना इतना भी आसान काम नही, इसे एक प्रोफेशनल ही सही से बता सकता है। लेकिन चलिए आज हम आपको उन signs के बारे में बताते है जिसे देखकर ही प्रोफेशनल जेंडर पता करते हैं।


हैमबर्गर साइन : यदि निरीक्षक इस निशान को सोनोग्राफी रिपोर्ट में ढूंढ लेता है तो वह लड़की होने की ओर संकेत करता है। 


कछुआ चिन्ह : अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में baby boy के इमेज में इस sign को ढूंढा जाता है जिसके बाद ही लड़के होने की बात कही जाती है।


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जरूर पढ़े : सोनोग्राफी से जेंडर कैसे पता करें



अल्ट्रासाउंड 3D और 4D इमेज - usg test in hindi 


3D या 4D अल्ट्रासाउंड कराए जानें के पिछे मुख्य कारण शारीरिक अंगो को गहराई से समझना होता हैं तभी डॉक्टर 3D या 4D अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। 3D अल्ट्रासाउंड में बहुत से फीचर्स और डिफेक्टस को आसानी से पता लगाया जा सकता हैं।


अगर बात 4D अल्ट्रासाउंड की करें तो यह भी 3D की तरह है लेकिन इसमें एक वीडियो रिकॉर्डिंग सी बन जाती हैं।


ये अधिक महंगे होते हैं। गर्भावस्था में 3D या 4D अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग 26 से 30 सप्ताह में करवाना उचित रहता हैं।




अल्ट्रासाऊंड में मोड्स | modes in ultrasound 


अल्ट्रासाऊंड में मोड्स का अपना ही अलग महत्व होता हैं मोड्स के जरिए अल्ट्रासाऊंड से साफ, सटीक और उपयोग हेतु आवश्यक अंग की ही इमेजेस लिए जाते हैं...


A Mode : ए - मोड जिसे एंप्लीट्यूड मोड भी कहते हैं एक सरल और सिंगल ट्रांसड्यूसर लाइन स्कैन है इसमें ध्वनि तरंगों को मुख्य रूप से अधिक गहराई तक पहुंचाना होता है इसलिए यदि अपका अल्ट्रासाऊंड गहराई से किया जाना होगा तो इस मोड का उपयोग किया जाएगा।


B Mode : बी - मोड, 2D मोड या ब्राइट मोड, इसमें एक सीधी रेखा में ट्रांसड्यूसर को आगे पीछे ले जाकर शरीर को स्कैन किया जाता है जिससे टू - डाइमेंशनल इमेज बनकर स्क्रीन पर दिखाई देता है। सामान्यतः इसी मोड में अल्ट्रासाऊंड स्कैनिंग की जाती है।



B flow Mode : बी - फ्लो मोड में तकनीकी रूप से गतिशील रिफ्लेक्टर्स को जांचा जाता है उदाहरण के लिए - लाल रक्त कोशिकाओ को, इसमें स्थिर कोशिकाओं को उभरने नहीं दिया जाता, हालांकि, इसके जरिए रक्त प्रवाह और स्थिर कोशिका दोनों को एक साथ देखा जा सकता है।


C Mode : सी - मोड इमेज एक समतल में बनता है इसमें बी - मोड के समान ही इमेज लिया जाता हैं लेकिन इसमें एक निश्चित गहराई तय कर स्कैन किया जाता है।


M Mode : एम - मोड और मोशन मोड, इसमें ए - मोड अथवा बी - मोड के समान ही इमेजेस लिए जाते हैं मगर कम समय में बहुत सारे इमेजेस लेकर उन्हें वीडियो के रूप में चलाया जाता है।




अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी | Elastography in ultrasound


अल्ट्रासाउंड का उपयोग इलास्टोग्राफी में भी किया जाता है ये एक नई इमेजिंग तकनीक है जिसमें कोशिकाओं के लचीले होने के गुण को समझते हुए अल्ट्रासाउंड किया जाता हैं 


कंप्रेशनल अल्ट्रासोनोग्राफी

कंप्रेशनल अल्ट्रासोनोग्राफी में अल्ट्रासाउंड प्रोब को त्वचा के विरुद्ध दबाया जाता हैं जिससे टारगेट स्ट्रक्चर प्रोब के और अधिक नज़दीक आ सकें। इससे उस एरिये की रेजोल्यूशन बढ़ जाती है। सप्रेशन के बाद और पहले की इमेजेस को जांच कर डाईग्नोसेज में उपयोग किया जाता हैं



पैनोरमिक अल्ट्रासोनोग्राफी

पैनोरमिक अल्ट्रासोनोग्राफी एक डिजिटल तकनीक है जिसमें बहुत से अल्ट्रासाउंड इमेजेस को जोड़कर एक बड़ा इमेज तैयार किया जाता है पैनोरमिक अल्ट्रासोनोग्राफी के जरिए किसी बड़े एबनॉमिलिटी या उसके रिलेशन में पड़े अन्य अंगों पर प्रभाव का पता लगाया जाता है



मल्टीपैरामेट्रिक अल्ट्रासोनोग्राफी

मल्टीपैरामेट्रिक अल्ट्रासाउंड में बहुत से अल्ट्रासाउंड तकनीको का उपयोग किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए किया जाता है उदाहरण के लिए - बी मोड, कलर ड्रॉपलर, रियल टाइम इलास्टोग्राफी आदि




सोनोग्राफी कैसे की जाती हैं | अल्ट्रासाउंड कैसे कार्य करता हैं | Level 2 ultrasound in hindi | sonography report kaise padhe in hindi


अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पढ़ने या समझने से पहले आपका यह जानना भी आवश्यक हैं आखिर अल्ट्रासाउंड कैसे कार्य करता हैं?? सोनोग्राफी कैसे की जाती हैं...? क्युकी पहली बार अल्ट्रासाउंड इमेज देखने पर आपको उसमें घुमावदार लकीरों के अलावा कुछ दिखें ही ना….


अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट समझने के लिए व्याख्यानों की जरूरत पड़ सकती हैं आईए इसे हम एक उदाहरण के जरिए समझते हैं - 



उदाहरण के लिए -


जैसे देख ना पाने वाला चमगादड़ हाई फ्रिक्वेंसी साउंड निकाल कर रास्ते में आने वाली चीजों को पहले ही भांप लेता हैं, क्युकी जब साउंड वेव किसी वस्तु से टकराकर वापस आती है तो वह जानवर उस लौटने वाले साउंड फ्रिक्वेंसी से डायरेक्शन और दूरी का पता लगा लेता है। 


इसी तरह ट्रांसड्यूसर भी हाई फ्रिक्वेंसी साउंड निकलता है जो शरीर अंदर tissues से टकराकर वापस आता है


कठोर और सघन tissues से साउंडवेव पार नहीं हो पाता जिसके कारण सांउडवावे ट्रांसडयूसर की तरफ वापस रिफ्लेक्ट हो जाते है। जिससे एक मजबूत इमेज बनता है जो सफेद कलर में दिखाई पड़ता है।


लेकिन वही फ्लूइड में साउंड वेव आसानी से पार चले जाते हैं जिसके कारण कोई इमेज नहीं बनता।


हालांकि, लगभग सभी टिशू कुछ ना कुछ इमेज देते हैं जो लगभग ग्रे कलर में होते हैं। जहां इसकी मात्रा अत्याधिक हो वह काले रंग में दिखाई पड़ते है। कुछ-कुछ सफेद धब्बों के साथ (snowglobe effect) 


जितना समय साउंड वेव को रिटर्न होने में लगता है वह बताता है कि ऑब्जेक्ट कितनी दूरी पर है। उदाहरण के लिए अगर सिग्नल को ज्यादा समय लग रहा हैं वापस आने में तो यह संकेत देता है कि ऑब्जेक्ट भी नीचे की ओर हैं और उसके मुताबिक इमेज बनता है।




अल्ट्रासाऊंड क्यों कराया जाता हैं | कैसे पढ़े सोनोग्राफी रिपोर्ट इन हिंदी - purpose of ultrasound


सोनोग्राफी (अल्ट्रासाऊंड) एक माध्यम है शरीर अंदर मौजूद कोशिकाओं के आकार तथा सघनता को मापने के लिए जिसका उपयोग मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए किया जाता है। ultrasound imaging करवाना उचित भी है बिना किसी चीर फाड़ के शरीर के अंदर झांक सकते हैं।


एब्डॉमिनल अल्ट्रासाऊंड में अक्सर गॉलब्लैडर डिजीज, किडनी स्टोन, किडनी डिजीज, लीवर डिजीज, अपेंडिक्स, ओवरिन् सिस्ट्स, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, यूटरिन ग्रोथ, फाइब्रॉयड जैसे कंडीशन के ट्रीटमेंट में किए जाते हैं।


सोनोग्राम कराएं जानें का मुख्य कारण अधिकांशतः गर्भ में शिशु और गर्भाशय के ग्रोथ को देखना। sonography test के जरिए आप शरीर में रक्त अथवा फ्लूइड के फ्लो को भी देख सकते हैं।


कंप्यूटर यहां आसानी से पता लगा लेता है कि शरीर में फ्लूइड ट्रांसडीयूजर से किस दिशा में जा रहा है तथा उस दिशा के अनुरूप इमेज तैयार करता है। लेकिन यदि ऑर्गन खाली अथवा गैस से भरा है तो अल्ट्रासाउंड भी उसे नहीं दर्शा पाता




रिस्क एंड कंट्राडिक्शन इन सोनोग्राफी - ultrasonography


इमेजिंग के लगभग सभी तौर तरीको को देखते हुए अल्ट्रासोनोग्राफी के कुछ पॉजिटिव तथा कुछ नेगेटिव बाते हैं



Strength : ------------------

  • मसल्स, सॉफ्ट टिशू और बोन सर्फेस को आसानी से इमेजिंग किया जा सकता है, खासकर द्रव और ठोस पदार्थ के बीच की लाइन को
  • लाइव इमेजेस डायनमिकली तैयार किए जा सकते है जिसे अल्ट्रासाउंड बायोप्सी और इंजेक्शन गाइड करने में उपयोग किया जाता हैं
  • ऑर्गन के स्ट्रक्चर को पता लगा सकते हैं
  • सावधानी से उपयोग किए जाने पर लंबी अवधि में नुकसानदायक नहीं होता
  • एक ही टिशू के बहुत सारे वैरिएंट लिए जा सकते हैं 
  • इसके इक्विपमेंट आसानी से उपलब्ध हैं
  • स्पेटीयल रेजोल्यूशन अन्य इमेजिंग तरीकों की तुलना में हाई फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड में अच्छे होते हैं
  • रियल टाइम इमेज लेने के लिए अल्ट्रासाउंड बेहतर विकल्प है



Weakness :-----------------

  • सोनोग्राफी से हड्डियों के पार इमेजिंग लेना कठीन है
  • ट्रांसड्यूसर और ऑर्गन के बीच गैस मौजूद होने पर इमेजिंग खराब मिलती है
  • हड्डियों व गैसेज की अनुपस्थिति के बावजूद गहराई में स्कैनिंग अभी भी लिमिटेड हैं
  • मोटे लोगों में इमेजिंग क्वालिटी और एक्यूरेसी लिमिटेड रहती हैं कारण फेट सेल्स
  • सोनोग्राफी को एक प्रोफेशनल व्यक्ति ही सही और सटीकता से कर सकत हैं
  • 80% सोनोग्राफर (RSI) repetitive strain injuries से पीड़ित होते है और (WMSD) work related musculoskeletal disorder 




अल्ट्रासोनोग्राफी के खतरे और नुकसान - Risk and side-effects of ultrasonography in hindi


डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) के मुताबिक अल्ट्रासोनोग्राफी कराना सामान्यतः सुरक्षित है


चिकित्सीय रूप में अल्ट्रासाऊंड इमेजिंग को सुरक्षित, आसान और हाईली फ्लैक्सिबल माना जाता है जो आंतरिक अंगों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम है।


भ्रूण जांच के लिए भी प्रेगनेंसी में चिकित्सीय अल्ट्रासाउंड पूरी तरह सुरक्षित है, हालांकि, इस प्रोसीजर को तभी किया जाना चाहिए जब मेडिकल जरूरत हो एवम् निम्न अल्ट्रासोनिक एक्सपोजर सेटिंग का उपयोग किया जाना चाहिए


हालांकि, अभी तक इसका कोई प्रमाण नहीं कि अल्ट्रासाउंड भ्रूण के लिए हानिकारक है लेकिन मेडिकल अथॉरिटी अल्ट्रासाउंड को फेटल वीडियो, इमेजेस, लिंग जांच में उपयोग से सख्त रोकती हैं




Hindiram के कुछ शब्द


सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी | अल्ट्रासाऊंड रिपोर्ट कैसे समझे इन सब के लिए आपको sonography (ultrasound) के कुछ बेसिक पता होने चाहिए जो आपको इस लेख में पता चल गया होगा। लेकिन अगर आप इसे गहराई से समझना चाहते है तो आपको  इसमें गहन अध्ययन की आवश्यक्ता पड़ेगी


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