तिल से गर्भपात कैसे करें | Til se garbhapat kaise kare

तिल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का बहुत अच्छा स्रोत है परंतु तिल की तासीर गर्म होती हैं इस कारण कुछ कंडीशन जैसे प्रेगनेंसी में परहेज की हिदायत दी जाती है।

परन्तु क्या गर्भावस्था में तिल खाना सेफ हैं ? यदि हां… तो कितनी मात्रा में तिल का सेवन करना चाहिए ? क्या तिल से गर्भपात भी हो सकता है

तिल की बात करें तो, ये दो प्रकार के होते हैं। पहला काला तिल और सफेद तिल, दोनों की अपनी अपनी विशेषता और उपयोग है जैसे –

काला तिल

काले रंग के तिल विशेष अवसरों जैसे – पूजा-पाठ में सर्वाधिक उपयोग किया जाता हैं।

सफेद तिल

सफेद तिल को खाने में अधिक उपयोग किया जाता है।

लेकिन सवाल अभी भी वही है, क्या गर्भावस्था में तिल खाना चाहिए ? क्या तिल से गर्भपात हो सकता हैं ? तिल से गर्भपात कैसे कर सकते हैं चलिए जानते है…

गर्भावस्था में तिल का सेवन | sesame seed in pregnancy

तिल-से-गर्भपात-कैसे-करें

दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाये जाने वाला यह तिलहन जैसे – भारत, तंजानिया, म्यांमार और सूडान, 3000 साल से भी पुराना है जिसका सेवन दुनिया भर के लोग करते हैं, लेकिन गर्भावस्था में…

वैसे गर्भवती महिलाए भी एक सीमित मात्रा में गर्भावस्था में तिल का सेवन कर सकती हैं। लेकिन असीमित मात्रा में तिल का सेवन हानिकारक रहता है…

तिल में मौजूद पोषक तक

कैलोरी – 573

फैट – 50g

सोडियम – 11mg

पोटैसियम – 468mg

कार्बोहाइड्रेट – 23g

डाइट्री फाइबर – 12g

शुगर – 0.3g

प्रोटीन – 18g

कैल्शियम – 97%

आयरन – 81%

विटामिन B-6 – 40%

मैग्नीशियम – 87%

जिंक – 21%

थायमाइन – 17%

नायासिन – 11%

क्या प्रेगनेंसी में तिल खाना चाहिए

केवल गर्भपात के लिए तिल का सेवन पर्याप्त नहीं, तथा इससे गर्भपात भी होगा। यदि आप सुरक्षित गर्भपात के तरीके जानना चाहती है…

आगे हम आपको उन सभी उपायों के बारे में बतायेंगे जिससे सुरक्षित गर्भपात किया जा सकता है। 

परन्तु आपको तिल जैसे घरेलू नुस्खे अपनाने से बचना चाहिए। 

आइए जाने गर्भावस्था में तिल खाने के फायदे तथा नुकसान क्या क्या होते हैं ?

गर्भाशय में तिल खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में तिल का सीमित मात्रा में सेवन गर्भवती और शिशु दोनों को फायदा पहुंचाता हैं। तिल खाने के फायदे… 

कब्ज की समस्या से राहत

गर्भावस्था में कब्ज का होना सामान्य है मगर क्या सामान्य नहीं है – गर्भवती का इससे परेशान रहना, तिल का सेवन कब्ज से राहत पहुंचा सकता है। 

इसमें मौजूद फाइबर कब्ज दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन यह भी ध्यान रखें, असीमित मात्रा में तिल नुकसानदायक हो सकता है इसलिए सही मात्रा में ही खाए।


हड्डियों के विकास में सहायक

भ्रूण अर्थात शिशु में, हड्डियों के निर्माण तथा मजबूती से विकसित होने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। काले तिल में कैल्शियम सर्वाधिक रहता हैं…

ऐसे में गर्भवती अगर तिल का सेवन करें, तो कैल्शियम की कमी नहीं होंगी।

एनीमिया से राहत 

अक्सर गर्भावस्था में बहुत महिलाए एनीमिया शिकार बन जाया करती है। यह माता और शिशु दोनों के लिए हानिकारक रहता हैं।

तिल में आयरन की मात्रा भी भरपूर होती हैं। ऐसे में यदि गर्भावस्था में तिल का सेवन किया जाए तो एनीमिया से छुटकारा पाया जा सकता हैं। क्युकी ये रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ा देता हैं।

एनर्जी बढ़ाता

गर्भावस्था में सुस्ती और कमजोरी का होना सामान्य लक्षणों में एक है जो सभी गर्भवतियों को होती है। तिल में मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर कर ऊर्जा प्रदान करते हैं।

रजोनिवृत्ति में हार्मोन बैलेंस करता

तिल में फाइटोएस्ट्रोजन होता है यह एक प्लांट कंपाउंड है जो एस्ट्रोजन हार्मोन की तरह कार्य करता है 

फाइटोएस्ट्रोजन के कारण तिल का सेवन रजोनिवृत्ति के समय एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी में हार्मोन बैलेंस करता है। लो एस्ट्रोजन सिस्टम जैसे – अचानक गर्मी महसूस होना, यह ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता हैं।


सपोर्ट इम्यून सिस्टम

तिल के बीजो में बहुत से न्यूट्रिएंट होते जो इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी होते है जैसे – जिंक, सेलीनियम, कॉपर, आयरन, विटामीन B6, विटामीन E और भी…

शरीर को जिंक की जरूरत विकास और सफेद रक्त कोशिकाओं को एक्टिवेट करने में पड़ती हैं। जो शरीर को बाहरी परजीवियों के हमले से बचाता है। 

ब्लड शुगर कंट्रोल

तिल में लो कार्बोहाइड्रेट और हाई प्रोटीन तथा हेल्दी अमाउंट ऑफ फैट्स होते हैं जो ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सहायता करते है।

इसके बीजों में पिनोरेसिनोल एक तरह का कंपाउंड होता है जो ब्लड शुगर रेगुलेट करता है। ये डाइजेस्टिव एंजाइम को भी इंक्रीज करता, जो ब्लड शुगर कम करने में सहायक रहता हैं। 

गर्भावस्था में तिल के नुकसान

अगर सीमित मात्रा में तिल का सेवन किया जाए तो इससे कोई नुकसान नहीं होगा। असीमित मात्रा इसका सेवन गर्भवती और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक रहता रहता है।

तिल एलर्जी होने वाले खाद्य पदार्थों की श्रेणी में गिना जाता है। क्युकी इससे एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसलिए कुछ गर्भवतियों को खास इससे परहेज करना चाहिए… 

इसमें फाइबर की मात्रा भी अधिक होता है लेकिन अधिक मात्रा में फाइबर लेना भी, पेट में ऐठन, दस्त जैसी समस्या का कारण बनता हैं।

गर्भपात के लिए तिल कैसे खाएं

  • खाना खाने के बाद तिल से बने लड्डू मीठे में ले
  • भुने हुए तिल को सब्जियों में गार्निश करें 
  • तिल की चटनी चावल या अन्य व्यंजन के साथ
  • तिल से सॉस बनाकर रोटी या ब्रेड के साथ
  • धनिया और पुदीने की चटनी में
  • तिल के तेल से खाना बनाने में

क्या घरेलू नुस्खे से गर्भपात किया जा सकता हैं

गर्भपात के लिए घरेलू नुस्खा खतरनाक है शायद इससे गर्भपात भी नहीं होगा, घरेलू उपाय से गर्भपात की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। 

  • घरेलू नुस्खों से गर्भपात नहीं होता
  • अधूरा गर्भपात की संभावना रहती
  • इंफेक्शन का खतरा रहता
  • जानलेवा होता
  • चाइल्ड डिफेक्ट का कारण बनता 

गर्भपात के सही तरीका

यदि आप अबॉर्शन करवाने की सोच रही है आपके पास दो रास्ते हैं जिनसे आप सुरक्षित रुप से गर्भपात करवा सकती है… लेकिन इससे पहले आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए

  • आपातकाल के लिए मेडिकल हेल्प सुनिश्चित करें
  • गर्भपात विशेषज्ञ की निर्देश में रहकर करें
  • घरेलू नुस्खे ना करें
  • अपूर्ण गर्भपात में मेडिकल हेल्प ले
  • सफल गर्भपात चेक करवाए

मेडिकल अबॉर्शन ( medical abortion )

मेडिकल अबॉर्शन एक प्रक्रिया है जिसमे आप कुछ दवाइयों की मदद से अपनी प्रेगनेंसी टर्मिनेट कर सकती है। इसमें दो मेडिकेशन यूज किए जाते है mifepristone और misoprostal जिससे पूरी तरह गर्भपात हो जाता हैं। लेकिन इसे आपको 10 सप्ताह से पहले कराना होता है।

सर्जिकल अबॉर्शन ( surgical abortion )

इस तरह के अबॉर्शन को 10 सप्ताह के बाद किया जाता है। जिसमे कुछ टूल्स का यूज करके गर्भाशय को खाली किया जाता है। सर्जिकल अबॉर्शन दो तरह के होते है – एस्पिरेशन अबॉर्शन, डाईलेशन एंड एवेक्यूशन अबॉर्शन, अबॉर्शन के दिन ही आप घर भी जा सकती है।

कुछ शोध में सामने आया, तिल जैसे घरेलू नुस्खों से गर्भपात, महिलाओ के लिए जानलेवा साबित होते, इससे गर्भवति की मृत्यु भी हो सकती है। अतः सही तरीके का प्रयोग करें।

काला और सफेद तिल कौन अच्छा है

काला तिल अधिक लाभदायक होता हैं क्योंकि इसमें फाइटोस्ट्रोल होता है जो कोलेस्ट्रोल कम करने में मदद करता हैं।

प्रेगनेंसी में तिल खाना चाहिए

जी हां… प्रेगनेंसी में तिल खा सकते हैं लेकिन सीमित मात्रा में, इसमें मोनो और पॉलि सेचुरटेड एसिड होता है जो गर्भवती और शिशु दोनों को फायदा पहुंचता है।

Hindiram के कुछ शब्द

तिल से गर्भपात कैसे करें ? til se garbhapat kaise kare यदि आप घरेलू नुस्खों से गर्भपात करने के बारे में सोच रहे होंगे, तो यह कारगर उपाय नहीं है इससे गर्भपात नहीं होगा आपको सही तरीके से गर्भपात कराना चाहिए

Share on:

Leave a Comment