शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में पुत्र प्राप्ति के उपाय | Shukl paksh or krishn paksh me putr prapti

पुत्र प्राप्ति के लिए प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में दिन-रात, शुक्ल पक्ष – कृष्ण पक्ष और महावारी के 16 रात्रियों के महत्व को परिष्कृत किया गया है। जिसके अनुसार यदि कोई दपंती निश्चित पुत्र अथवा पुत्री की प्राप्ति करना चाहें तो कर सकते हैं।
अगर आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति करनी है साथ ही आप चाहते हैं शिशु गुणवान हो, बुद्धिमान हो, गोरा हो तो आपको महामारी के विभिन्न रात्रियों के महत्व को समझना होगा
आयुर्वेद के अनुसार गर्भधान ऋतुकाल की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को किया जाना चाहिए। मासिक ऋतु स्त्राव के शुरुआती दिन को प्रथम मानकर छठवीं, आठवीं और दसवीं जैसी सम रात्रियों को पुत्र तथा सातवीं, नौवीं जैसी विषम रात्रियों से पुत्री का जन्म होता है।
इस बात का खास ध्यान दे, इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष अर्थात चांदनी वाला पखवाड़ा होना चाहिए मतलब कृष्ण पक्ष की राते ना हो

शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष में पुत्र प्राप्ति कैसे करें | Shukl paksh or krishn paksh me putr prapti

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हिंदू धर्म में अक्सर विशेष अवसरो, कार्य के आयोजन में तिथियों की विशेष भूमिका रहती है फिर चाहे वह शादी-ब्याह का मामला हो या किसी बच्चे के जन्म का, अक्सर ऐसे अवसरों के लिए पंचांग से एक विशेष तिथि का चयन किया जाता है जिसे “शुभ मुहूर्त” कहा जाता है

हिन्दू पंचांग में शुक्ल और कृष्ण पक्ष का महत्त्व – hindu panchang me Shukl or krishn paksh ka mahatva

पंचांग एक हिंदू कैलेंडर है जैसे दैनिक पंचांग (जहां पूरे दिन का विवरण मिलता है), मासिक पंचांग (जहां पूरे माह का विवरण किया जाता है) मासिक पंचांग में एक माह को 30 दिनों में बांटा गया है तथा इन 30 दिनों को 15-15 दिवस दो पक्षों में विभाजित किया गया है जिसमें 15 दिन शुक्ल पक्ष रहता है तो बाकी बचे 15 दिन कृष्ण पक्ष के होते हैं
यहां चंद्रमा के कम ज्यादा होने (कलाओं) को ही शुक्ल और कृष्ण पक्ष कहा जाता है आइए जानते हैं इसका वास्तविक जीवन में क्या महत्व है

कृष्ण पक्ष क्या होता है | Krishna Paksha kya hota hai

पूर्णिमा (पूर्ण चांद रात्रि) और अमावस्या के बीच के दिनों को कृष्ण पक्ष कहते हैं। कृष्ण पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा के अगले दिन से होती है जो अमावस्या के दिन तक चलती है, यहां चंद्रमा धीरे-धीरे छोटा होते जाता है
ऐसी मान्यता है, कृष्ण पक्ष के दौरान किसी भी शुभ कार्य का संपन्न होना उचित नहीं होता, इसके पीछे कारण घटते हुए चंद्रमा की कलाओं को माना जाता है पूर्णिमा (पूर्ण चांद रात्रि) के बाद जैसे जैसे दिन बढ़ता है वैसे ही चंद्रमा का प्रभाव कम होने लगता है चंद्रमा का प्रकाश और आकार घटने से रात्रि अंधेरी होने लगती है इसलिए कृष्ण पक्ष को शुभ नहीं माना जाता

शुक्ल पक्ष क्या होता है – Shukl paksha kya hota hai

शुक्ल पक्ष की शुरुआत अमावस्या के अगले दिन से होती है जो पूर्णिमा (पूर्ण चांद रात्रि) वाले दिन तक चलती है। अमावस्या के दूसरे दिन से ही चंद्रमा आकार में और प्रकाश में बढ़ने लगता है। रोशनी बढ़ने लगती है। इस समय चंद्रमा का प्रभाव अत्याधिक बलशाली होता है इसी कारण अधिकतम शुभ कार्य, विशेष अवसरों के लिए शुक्ल पक्ष की तिथियों को उत्तम व सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

पुत्र प्राप्ति के लिए महावारी के 16 रात्रियों का महत्व | Putr prapti ke liye mahavari ke 16 ratriyo ka mahatva

आयुर्वेद के अनुसार पुत्र प्राप्ति के लिए गर्भधान ऋतुकाल की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को किया जाना चाहिए। मासिक ऋतु स्त्राव के शुरुआती दिन को प्रथम मानकर छठवीं, आठवीं और दसवीं जैसी सम रात्रियों को पुत्र तथा सातवीं, नौवीं जैसी विषम रात्रियों से पुत्री का जन्म होता है।
हालांकि, शुरुआत के 4 रात्रियों को निष्क्रिय माना जाता है जहां कोई संतान प्राप्ति नहीं होती हैं जिसके पश्चात रात्रियों के गर्भधान से पुत्र अथवा पुत्री की प्राप्ति होती हैं –
  1. चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा हुआ पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है
  2. पांचवी रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में केवल पुत्र संतान पैदा करेगी
  3. छठी रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु का पुत्र जन्म लेगा
  4. सातवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या बांझ होगी
  5. आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता हैं
  6. नवी रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशाली पुत्री का जन्म होता हैं
  7. दसवीं रात्रि के गर्भधान चतुर पुत्र जन्म लेता है
  8. ग्यारहवीं रात्रि के गर्भधान से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती हैं
  9. बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता हैं
  10. तेरहवीं रात्रि के गर्भ से वर्णसंकर पुत्री पैदा होती है
  11. चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र जन्म लेता हैं
  12. पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है
  13. सोलहवीं रात्रि के गर्भधान से सर्वगुण संपन्न पुत्र पैदा होता है।
अर्थात 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16 जैसी सम रात्रियों के गर्भधारण से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13, 15 जैसी विषम रात्रियों के गर्भधान से पुत्री का जन्म होता है।
ज्योतिषियों के मुताबिक सूर्य उत्तरायण में रहने से पुत्र तथा दक्षिणायन रहने की स्थिति में पुत्री का जन्म होता हैं मंगलवार, गुरुवार, रविवार पुत्र तथा सोमवार, शुक्रवार कन्या और बुध और शनि को नपुंसक संतान जन्म लेता है।

पुत्र प्राप्ति के संकेत | putr prapti ke संकेत

हाई कैलोरी डाइट लेना

एक वैज्ञानिक शोध में यह पता चला है कि जो माए पुत्र संतान को जन्म देती है वे गर्भावस्था के दौरान हाई कैलोरी डाइट ले रही होती थी। रिसर्च का दावा है कि 56% गर्भवतीयां जिन्होंने कंसीव करने के बाद हाई कैलोरी डाइट लिया था उन्हें 45% गर्भवतीयों के मुकाबले लड़के को जन्म दिया। इसके पीछे वजह यह बताई जाती है कि लड़कों को ज्यादा चीजों की जरूरत होती है ज्यादा कैलोरी की भी

कपल्स का साथ रहना

गर्भवतीयों पर हुए एक शोध में यह पता चला है कि कंसीव करने के बाद जो महिलाएं अपने पार्टनर के साथ अधिक रहती हैं उन्हें लड़का होने की अधिक चांस रहते हैं।

ज्यादा भूख लगना

गर्भवतीयों के खाने पर हुए एक शोध में इस राज का खुलासा किया गया, गर्भवती जो प्रेगनेंसी में सामान्य से 10% अधिक कैलोरी खाती थी उन्होंने लड़को को जन्म दिया। इसका कारण पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टरॉन को माना जाता है जो गर्भवती को अधिक खाने का संकेत देता है

मनपसंद खाद्य पदार्थों से परहेज

कुछ रिसर्च का यह भी मानना है जो गर्भवती प्रेगनेंसी में अपने मनपसंद चीजों से परहेज (अरूचि) दिखाने लगती हैं उनमें लड़के को जन्म देने की संभावना अधिक होती है
मनपसंद खाने की प्रति अरुचि का कारण शिशु की सुरक्षा को माना जाता हैं संवेदनशील शिशुओं की सुरक्षा के लिए माता का शरीर बहुत सी चीजों से परहेज करने लगता हैं।

आंतों की डायबिटीज

एक शोध में यह तथ्य भी सामने आया कि जिन गर्भवती महिलाओं ने बेबी ब्वॉय को जन्म दिया था खासकर प्रेगनेंसी में आंतों की डायबिटीज समस्या की शिकार थी। यह प्रेगनेंसी की एक कंडीशन है जहां रक्त में ग्लूकोज लेवल बहुत अधिक हो जाता है। रिसर्चस् को अभी तक पता नहीं बेबी ब्वॉय होने पर शरीर में इस तरह मेटाबोलिक चेंजेस क्यों होते हैं इसे अनेको शोधों द्वारा समर्थन भी किया जाता है।

पुत्र प्राप्ति के लिए हमें क्या करना चाहिए | Shukl paksh or krishn paksh me putr prapti ke liye hume kya karna chahiye

एक लड़के और लड़की का जन्म निर्धारण उसी समय हो जाता है जब महिला में फर्टिलाइजेशन (निषेचन) की प्रक्रिया होती है जहां यदि पुरुष के [Y] और महिला के [X] क्रोमोजोम मिलते हैं तो गर्भधारण से लड़के का जन्म होता है
यहां आप कुछ चीजें ऐसी कर सकते हैं जो आपके लड़का गर्भधारण करने की संभवना को बढ़ा देता हैं –

लड़के के जन्म के लिए आहार

केला
केले को पोटेशियम का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता हैं पोटेशियम नर शुक्राणुओं को स्वस्थ और बलशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो आपके लड़का गर्भधारण करने में मदद करता हैं
जिंक
पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए जिंक बहुत अच्छा पोषक तत्व हैं इसलिए प्रेगनेंसी में इसका भरपूर सेवन करें
हाई कैलोरी
ज्यादा कैलोरी भोजन, जिसमें ग्लूकोज की मात्रा अधिक रहती है लड़का होने की संभावना बढ़ा देते हैं
Hindiram के कुछ शब्द
शुल्क पक्ष या कृष्ण पक्ष में लड़का कैसे पैदा होता हैं? शुल्क पक्ष में पुत्र प्राप्ति के उपाय या कृष्ण पक्ष में पुत्र प्राप्ति के उपाय के लिए आवश्यक है आप मासिक ऋतु स्त्राव के 16 रात्रियों के महत्व को समझे, जिसके अनुसार यदि आप गर्भधारण करती है तो अवश्य पुत्र संतान को प्राप्ति होगी
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