शादी के बाद बच्चा कैसे पैदा होता है – बच्चें की डिलीवरी कैसे होती हैं | baccha kaise hota hai

क्या आपके जेहन में कभी ये सवाल आया, baby kaise banata hai, उसका जन्म कैसे होता है (baccha kaise hota hai) हम सभी को जन्म देने वाली भी एक जननी ही थी जिसने 9 महीने हमें गर्भ में पाला पोशा और बाहर की दुनिया से रूबरू कराया…

एक बच्चे के पैदा होने से शुरू से अंत तक, आनेको अड़चने आया करती है। जिस महिला को बच्चा होने वाला होता है वह भी बहुत परेशानियों से गुजर कर, एक स्वस्थ, सुंदर और बलाशिय बच्चे को जन्म देती है।

बच्चा पैदा करने childbirth के लिए केवल महिला ही जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि पुरुष, दोनों पार्टनर बच्चे के जन्म में समान रूप से भागीदार होते हैं।

जब तक baby birth नहीं हो जाता, उसका सही से पालन पोषण माता-पिता को ही करना होता है। इस बात का भी ध्यान रखना होता है कभी अनजाने अगर कोई समस्या आ जाती है कैसे बच्चे को सुरक्षित रखा जाए,

बच्चा कैसे पैदा होता है इससे संबंधित तथ्य तो बहुतो है जो एक स्वस्थ बच्चे के जन्म  का निर्धारण करती हैं। चलिए, आप – हम, उन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करें जो एक बच्चा पैदा होने अर्थात जन्म के लिए आवश्यक रहता हैं – bacche kaise hote hain

Table of Contents

शादी के बाद बच्चा कैसे होता हैं – बच्चें की डिलीवरी कैसे होती हैं | baccha kaise hota hai

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baby birth – एक बच्चे का जन्म तब तक नहीं हो सकता है जब तक माता के गर्भ में शिशु 9 महीने विकसित ना हो जाए, बच्चे पैदा करने की विधी की पहली शुरुआत महिला के गर्भधारण करने से होती हैं।

गर्भधारण कैसे होता है – वैसे इसपर एक बहुत अच्छा लेख हमारी वेबसाइट पर पहले ही मौजूद है आप चाहे तो वह लेख गर्भधारण कैसे होता है पढ़ सकते हैं इस लेख में हम bacha kaise paida hota hai, baby delivery kaise hota hai जानेंगे….

बच्चें की डिलीवरी कितने प्रकार से होती हैं | Types of delivery of baby. kaise hota hai baccha

वैसे जन्म की बात करें तो, आज का समय ऐसा है जहां baby birth (शिशु के जन्म) के लिए अनेकों मेथड उपलब्ध हैं जैसे – होम डिलीवरी मेरा मतलब Home birth, सीजेरियन डिलीवरी, नॉर्मल डिलीवरी, वाटर बर्थ…

नॉर्मल डिलीवरी या normal labour में शिशु का जन्म प्राकृतिक रूप से होता हैं यहां baby birth में किसी तरह की समस्या नहीं आती मगर सीजेरियन डिलीवरी से childbirth तब किया जाता हैं जब बच्चा खुद को गर्भनाल से फंसा ले अथवा माता या शिशु दोनों में किसी को खतरा हो…

आइए जानते हैं यदि कोई महिला नॉर्मल डिलीवरी करना चाहती है, हॉस्पिटल में, वह कैसे होगा ?

बच्चे की डिलीवरी कैसे होती है – baby kaise hota hai delivery

शिशु अर्थात baby delivery होना बहुत चीजों पर निर्भर करता है जैसे pre-term birth होगा या post-term birth, हालांकि, baby development कैसे हो रहा है यह भी आवश्यक है बच्चे की normal labour के लिए

बच्चा कैसे पैदा होता हैं ? बच्चा कहाँ से पैदा होता हैं ? बच्चा कहाँ से निकलता है ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर तो आपको labour room में चलकर ही मिलेगा, चलिए जानते है हॉस्पिटल में गर्भवती के साथ क्या क्या होता है – baccha kaise hota hai

गर्भवती हॉस्पिटल कब जाना चाहिए – garbhvati kab hospital Jay

जब महिला को हर 10 से 15 मिनट में दो से तीन बार लेबर पेन होने लगे या फिर किसी महिला की पानी की थैली फूल जाए, ऐसे में तुरंत हॉस्पिटल के लिए रवाना होना चाहिए।

घर से हॉस्पिटल के बीच आवश्यक चीजें

घर से हॉस्पिटल के लिए निकलने पर महिला को शिशु के मूवमेंट (हरकतों) के प्रति जागरूक रहना चाहिए, क्योंकि यह सवाल आपसे पूछा जाएगा कि घर से हॉस्पिटल के बीच बच्चे की मूवमेंट कैसी थी? अगर आपको नहीं पता होगा तो आपसे एक डॉक्यूमेंट साइन करवाया जाएगा कि आपको बच्चे की मूवमेंट नहीं पता

हॉस्पिटल में क्या क्या होगा – hospital me kya hoga

इसके बाद आपको एक बैड दे दिया जाएगा। अगर महिला किसी अच्छे प्राइवेट हॉस्पिटल में है तो वे अपने खर्च के मुताबिक रूम की कैटेगरी चुन सकती है। अगर महिला गवर्नमेंट हॉस्पिटल में हैं तो उन्हें जनरल वार्ड में लिटा दिया जाता है तथा महिला को पैर फैलाकर रखने को कहा जाता है ताकी सर्विक्स का मुंह खुल सकें 

गर्भवति का बीपी चेक होगा, वेट चेक किया जाएगा। इसके बाद महिला को “आई वी कैनुला” लगाई जाएगी। तथा इसी से इंजेक्शन और जरूरत पड़ने पर ब्लड भी दिया जा सकता है।

यहां एक लेडी डॉक्टर, महिला के प्राइवेट पार्ट का उंगली डालकर जांच करेंगी की सर्विक्स का मुंह कितना खुला है। एक नॉर्मल डिलीवरी के लिए कम से कम 10 सेंटीमीटर तक सर्विस का खुला होना आवश्यक हैं।

जरूरी बात : अगर महिला की सर्विक्स नहीं खुली है तो डॉक्टर महिला के प्राइवेट पार्ट में उंगली डालकर एक जेल लगा देंगी जिससे कुछ ही देर में महिला को दर्द होने लगेगा, और सर्विक्स का मुंह भी खुलने लगेगा।

डिलिवरी की तैयारी कैसे की जाती हैं? – bacha kaise paida karte hai

अगर महिला सरकारी हॉस्पिटल में गई होंगी तो नर्स उनके अटेंडेंट को कुछ दवाइयां लाने को भेजेंगे, और यहीं दवाइयां डिलीवरी के समय गर्भवति को दिया जाएगा

इसके बाद महिला को कुछ खाने को दिया जाएगा, और इसे खाने के कुछ ही देर में महिला को उल्टी होने वाली है। ताकि आपके पेट में कुछ भी ना रहे और डिलीवरी के समय उल्टी जैसी समस्या ना हो

हर आधे घंटे में डॉक्टर आकर ये चेक करते रहेंगी कि महिला का सर्विस कितना खुला है। एक समय आएगा जब महिला को हर 2 से 3 मिनट में लेबर पेन होने लगेगा और प्राइवेट पार्ट से हल्का सब ब्लड आने लगेगा, पीले रंग का डिस्चार्ज होने लगेगा है 

जब ऐसा होने लगता है तब गर्भवती को लेबर रूम में ले जाया जायेगा, व्हीलचेयर पर अथवा स्ट्रेचर पर लिटा कर

लेबर रूम मे गर्भवति के साथ क्या होगा – labour room me kya hota hai. labour ward delivery

लेबर रूम में गर्भवती महिला को एक बेड पर लिटा दिया जाएगा, और ये बेड बहुत छोटा होने वाला है जिससे महिला अपना पैर सीधा ना कर सके। इसके दोनों तरफ पैर को रखने के लिए स्ट्रेंड बने होंगे जिसमें पैरों को फसाना होगा, और हां, दोनो हाथो के पास रॉड होंगे,

जब डॉक्टर महिला को पुश करने की कहेंगे इन्हीं रॉड्स की सहायता से पुश करना होता है और उम्मीद है 2 से 3 पुश में ही बेबी बाहर आने लगेगा।  

जैस शिशु बाहर आने लगेगा, डॉक्टर महिला के प्राइवेट पार्ट में चीरा लगा देंगे जिससे बेबी को निकलने में कोई तकलीफ ना हो, बेबी का सिर बाहर आते ही उसे पकड़ कर बाहर खींच लेंगे और गर्भनाल काट देंगे।

बच्चे के जन्म के बाद क्या होगा – baby kaise hota hai delivery

बेबी को क्लीन किया जाएगा, कुछ हॉस्पिटल्स में जन्म के माता से शिशु को स्पर्श कराया जाता है। थोड़ी देर गर्भवती को वैसे ही लेट रहने को कहा जायेगा, प्लेसेंटा बाहर निकाल कर प्राइवेट पार्ट को क्लीन किया जाएगा और फिर टांके लगा दिए जायेंगे

महिला को तब तक लेबर रूम में रखा जाएगा जब तक टॉयलेट ना आजाए, जिससे अगर वैजाइना के रास्ते में कुछ फंसा भी हो वह बाहर आ जाए और इंफेक्शन होने का खतरा भी ना रहें

इसके बाद महिला और बच्चे को 24 घंटे के लिए निगरानी में रखा जाएगा अगर सब कुछ सही होगा तो डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

बच्चा पैदा करने के लिए महिला को क्या करना चाहिए, पुरूष क्या करे – bacha kaise paida hota hai

बच्चा पैदा करने की विधि की पहली शुरुआत – महिला तथा पुरुष के असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने से होती हैं, क्युकी असुरक्षित यौन संबंध से ही महिला गर्भधारण करती है।

आइए जानते हैं बच्चा पैदा होने तथा गर्भधारण के लिए महिला पुरूष के कौन कौन से अंग महत्वपूर्ण होते है और वे कैसे क्रियान्वित होते है….

बच्चा पैदा करने में महिला तथा पुरुष प्रजनन अंगों का महत्व – baccha kaise hota hai in hindi

बच्चा पैदा करने के लिए क्या करना पड़ता है – यहां महिला तथा पुरुष के प्रजनन अंगों का बहुत बड़ा योगदान रहता है जिससे ही baby banta और पैदा होता हैं

महिला के प्रजनन अंगों का महत्व

गर्भाशय (uterus)

गर्भाशय उस स्थान को कहा जाता है जहां गर्भधारण के पश्चात शिशु 9 महीने विकसित होता है यह नाभि के नीचे, शरीर के अंदर होता है।

अंडाशय (overy)

अंडाशय का मुख्य कार्य, अंडाणुओं का निर्माण करना होता है। अंडाशय के अंदर लाखों एग फॉलिकल्स होते हैं तथा मासिक चक्र के दौरान इन्हीं किसी एक फॉलिकल्स से अंडाणु रिलीज होते है।

अंडाणु (ovum)

अंडाणु ही आगे चलकर भ्रूण निर्माण करता है। यह तब होता जब अंडाणु पुरुष के शुक्राणु से मिलता है अर्थात फर्टिलाइजेशन होता है।

फेलोपियन ट्यूब (fallopian tube)

फैलोपियन ट्यूब उस नली को कहते हैं जो अंडाशय और गर्भाशय को जोड़ने का कार्य करता है। इसका एक और महत्वपूर्ण कार्य है फर्टिलाइजेशन, अर्थात शुक्राणु तथा अंडाणुओ का मिलना फेलोपियन ट्यूब मे ही होता है।

योनि (vaigina)

योनि के अलावा एक और अंग होता है सर्विक्स जो गर्भाशय और योनि को जोड़ता हैं। योनि मार्ग से ही प्रसव के दौरान शिशु का जन्म होता है।

पुरुष के प्रजनन अंगों का महत्व

शुक्राणु (sperm)

इसे आप वीर्य ही समझे, हालांकि, वीर्य और शुक्राणु में थोड़ा अंतर होता है शुक्राणुओं का निर्माण टेस्टिकल्स में होता है। यही शुक्राणु, अंडाणुओ से निषेचित होकर भ्रूण (बच्चे) का निर्माण करती हैं।

टेस्टीकल्स (testicals)

यह एक थैली के समान, लिंग के नीचे लड़का होता है। दोनों टेस्टिकल्स में ही शुक्राणुओं का निर्माण होता है। शुक्राणुओं के निर्माण के लिए निम्न तापमान की आवश्यकता पड़ती है 3 डिग्री सेल्सियस, इसलिए यह शरीर के बाहर लटका होता है

लिंग (penise)

ये पुरुषों में मुख्य प्रजनन अंग होता है। लिंग के रास्ते शुक्राणु, योनि से होते हुए अंडाणु तक पहुंचते हैं जिसके बाद फर्टिलाइजेशन और फिर गर्भधारण होता है।

गर्भ में बच्चा कैसे बनता है | गर्भ में भ्रूण का विकास – baby kaise banta hai

kaise hota hai Baccha – आप यह तब तक नहीं जान सकती जब तक, baby kaise banta hai – गर्भ में भ्रूण का विकास कैसे होता है नहीं जान लेते…

विकास की प्रक्रिया ही शिशु के जन्म को निर्धारित करती है शिशु प्रीमेच्योर होगा, फुल टर्म होगा या पोस्ट टर्म होगा, यदि आप नहीं जानते ये सब क्या तो चलिए जानते हैं

गर्भ में भ्रूण विकास प्रक्रिया| बच्चा कैसे पैदा किया जाता है – child development in womb. kaise banta hai baby

गर्भ में शिशु विकास की प्रक्रिया निम्न प्रकार होती है…

          शुक्राणु और अंडाणु (egg and sperm)

                              |

                         जायगोटे (zygote)

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                         एंब्रॉय (Embroy)

                              |

                        फिटस (fetus)

                              |

                        बेबी (baby)

शुक्राणु और अंडाणु का मिलना | fertilization ke lakshan

शुक्राणु तथा अंडाणु का मिलना, भ्रूण विकास प्रक्रिया का पहला चरण है हालांकि, अभी आपको भ्रूण का कोई भी अंश  देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि अभी तो भ्रूण का निर्माण हुआ ही नहीं, बस अंडाणु और शुक्राणु हैं जो फर्टिलाइजेशन का इंतजार कर रहे है।

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर – bacha kaise paida hota hai

शुक्राणु और अंडाणु कब और कैसे मिलते हैं

शुक्राणु और अंडाणु का मिलन दो प्रकार से हो सकता हैं, पहला – जब शुक्राणु पहले से ही फैलोपियन ट्यूब (फर्टिलाइजेशन की जगह) में इंतजार कर रहें हो, ओव्यूलेशन से रिलीज हुए अंडाणु के फैलोपियन ट्यूब में आने का:

दूसरा – ऐसा भी हो सकता है अंडाणु पहले से फेलोपियन ट्यूब में आ चुका हो और किसी शुक्राणुु  के आने तथा उससे फर्टिलाइज होने का इंतेजार कर रहा है

ओव्यूलेशन क्या और कब होता हैं? Oviulation kab hota hai

मासिक धर्म चक्र में ही ओव्यूलेशन होता हैं ओव्यूलेशन महिला के आखरी मासिक चक्र से 14 दिन पहले होता हैं। इसी समय ओवरी (अंडाशय), अंडाणु रिलीज करती है इसलिए ओव्यूलेशन के समय बनाए गए असुरक्षित यौन संबंध ही गर्भधारण कराते हैं। यह 5 से 6 दिनों का समय होता है वैसे बाजार में ऐसे बहुत से किट और ऐप्स आ गए हैं जो महिला के ओव्यूलेशन ट्रैक करने में मदद करते हैं

फर्टिलाइजेशन कैसे होता है? Fertilization ke lakshan

फर्टिलाइजेशन (निषेचन) एक प्रक्रिया है जिसमें पुरुषों के शुक्राणु महिला के अंडाणु के अंदर दाखिल होते हैं और भ्रूण का निर्माण कराते है। हालांकि वैज्ञानिक तौर पर निषेचित अंडाणु को जायगोटे कहा जाता है।

जुड़वा बच्चे कैसे पैदा होते हैं? Twins baby kaise hote hain 

ये बहुत रेयर होता है लेकिन कई बार महिला का शरीर ओव्यूलेशन में केवल एक अंडाणु निष्कासित करने की जगह, दो अंडाणु निष्कासित कर देता है। और यदि फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया में दोनों अंडाणु निषेचित हो जाते हैं तो जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। दो जायगोटे…

जायगोटे में रूपांतरण और विकास क्रिया | zygote kaise banta hai

ओव्यूलेशन में ही फर्टिलाइजेशन होता है तथा जायगोटे का निर्माण होता है। जायगोटे (zygote) बस एक निषेचित अंडाणु है जो उछलते – कूदते खुद को गर्भाशय में स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रहा है। गर्भाशय तक के इस सफर में यह खुद को भीतर से अलग-अलग कोशिकाओं में विभाजित करता हैं यही कोशिकाएं आगे चलकर भ्रूण अंगों के रूप में विकसित होंगे

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर – baccha kaise paida hota hai

फर्टिलाइजेशन और गर्भधारण में अंतर – fertilization or garbhadharn

गर्भधारण कैसे होता है – फर्टिलाइजेशन का मतलब गर्भधारण नहीं होता, गर्भधारण तब तक नहीं होता जब तक निषेचित अंडाणु खुद को गर्भाशय में स्थापित ना करले, जब zygote गर्भाशय की दीवार से खुद को चिपका लेता है तब महिला कंसीव करती है।

गर्भधारण कब होता है कितना समय लगता – garbhadharn kaise hota hai

बात करें अगर फर्टिलाइजेशन की तो इसमें 30 मिनट या 4 – 5 दिन लग जाते हैं फर्टिलाइजेशन के बाद निषेचित अंडाणु खुद को गर्भाशय में स्थापित करता हैं जिसमें 5 से 6 दिन और लग जाते है इसका मतलब गर्भधारण में 6 से 14 दिनों का समय निश्चित है। प्रेगनेंसी का पता आप pregnancy test से लगा सकती हैं।

प्रेगनेंसी टेस्ट कब करना चाहिए – pregnancy test kaise kare

प्रेगनेंसी का पहला और सफल लक्षण होता है मासिक धर्म चक्र का रुक जाना (पीरियड मिस होना), आप 1 से 2 दिनों के भीतर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। यदि आप पीरियड मिस होने का इंतजार नहीं करना चाहते तो असुरक्षित यौन संबंध बनाने के 2 से 3 सप्ताहों में प्रेगनेंसी टेस्ट ले सकते हैं।

जायगोटे (zygote) से जुड़वा बच्चा पैदा कैसे होता है

जब निषेचित अंडाणु जायगोटे (zygote) में परिवर्तित होता है तब भी जुड़वा बच्चे होने की संभावनाएं होती हैं। कुछ रेयर केसो में निषेचित अंडाणु खुद को दो भागो मे विभाजित कर लेते हैं जो आगे चलकर 2 भ्रूण का निर्माण करते हैं।

एंब्रॉय का विकास – Embroy  development of baby in hindi

एंब्रॉय को भ्रूण भी कहते हैं बल्कि भ्रूण का अविकसित रूप एंब्रॉय कहलाता है। जायगोटे (zygote), एंब्रॉय में तब परिवर्तित होता है जब वह खुद को गर्भाशय में स्थापित कर लेता हैं तथा यहीं से शुरू होता है गर्भ में भ्रूण का विकास प्रक्रिया, जो आगे आने वाले 8 से 9 महीने में शिशु विकसित होगा

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर  – bacha kaise paida hota hai

गर्भ में जीव कब आता है? गर्भ में बच्चे के अन्दर कितने महीने में जान आती है ?

अगर आपका मतलब गर्भ में शिशु के दिल धड़कने से है तो यह 5 – 6 सप्ताह गर्भधारण के बाद शुरू हो जाता है। गर्भधारण के 4 सप्ताहों में ही शिशु का दिल बनने लगता तथा 5 वे सप्ताह में धड़कना भी शुरू कर देता हैं। 6 से 9 सप्ताहों के बीच यदि आप अल्ट्रासाऊंड टेस्ट कराए तो शिशु की हार्टबीट पता कर सकते है।

शिशु के दिल की धड़कन – baby heart beat 

जब शिशु छ: सप्ताह का हो जाता है तब उसकी हार्टबीट 110 बीट प्रति मिनट होती है तथा दो से तीन सप्ताहों में यह 150 से 170 बीट प्रति मिनट तक बढ़ जाता है। 10 सप्ताह में ये 170 बीट प्रति की तेजी से धड़क रहा होता है। 20 वे सप्ताह के आने से फेटल हार्ट रेट 140 बीट प्रति मिनिट हो जाता हैं हालंकि, जन्म के समय नॉरमल फेटल हार्ट रेट 160 बिट्स पर मिनिट होता है।

गर्भ में बच्चा कैसे रहता है – baby in womb symptoms

गर्भाशय में भ्रूण एक झिलिनुमा कवच से ढका होता है। यहां एक प्लेजेंटा भी है जो शिशु के साथ विकसित होता है जो बच्चे को न्यूट्रीशन, ऑक्सीजन जैसे आवश्यक चीजों की पूर्ति करता है। गर्भ में बेबी पोजीशन सभी शिशुओं में अलग होती है लेकिन जन्म के समय शिशु birth position (सिर नीचे और पैर ऊपर) आ जाता है।



पेट में लड़का है लड़की कैसे पता लगाएं – child birth prediction

गर्भ में लड़का है या लड़की, बेटा या बेटी, पुत्र या पुत्री इन सभी का पता लगाने के वैसे तो बहुत से तरीके हैं जैसे –

  • पुरानी मां के तरीके से जाने बेटा होगा या बेटी
  • अल्ट्रासाउंड से कैसे पता लगाएं लड़का या लड़की
  • पहली, दूसरी, तीसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण

फिटस का निर्माण – fetus development in pregnancy

फिटस को भी भ्रूण  कहते है। लेकिन फिटस (fetus) भ्रूण का विकसित रूप है दूसरी तिमाही के बाद एंब्रॉय का परिवर्तन फिटस (fetus) में होता है। जहां एंब्रॉय में भ्रूण के अंग बने नहीं होते, फिटस (fetus) में ये सभी अंग बनकर तैयार हो जाते हैं तथा अब उनका विकास शुरू होता है।

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर  – bacha kaise paida hota hai

अभी शिशु कितना बड़ा है – baby size in pregnancy

27 सप्ताह गर्भावस्था की शुरुआत तीसरी तिमाही की भी शुरुआत होती है इस समय शिशु का आकार 14 ½ इंच लंबा मतलब एक फुट से ज्यादा हो चुका है। उसका वजन भी 2 पाउंड तक हो चुका है। शिशु अब इंसानों के बच्चे जैसे भी दिखने लगा।

फिटस शिशु कब बनता है – when fetus became baby

डॉक्टर के मुताबिक एक फिटस (fetus) शिशु तब तक नहीं कहलाता, जब तक वह माता के गर्भ से बाहर ना आजाए अर्थात उसका जन्म न हो जाए

प्रीटर्म, फूल टर्म और प्रीमेच्योर बर्थ – baccha kaise hota hai

“टर्म प्रेगनेंसी” उन शिशुओ के जन्म के लिए उपयोग किया जाता है जिनका जन्म 37 सप्ताह गर्भावस्था के बाद होता है। 37 सप्ताह गर्भावस्था से पहले जन्मे शिशुओं को प्रीटर्म या प्रीमेच्योर कहा जाता है। शिशु जिनका जन्म 42 सप्ताह के बाद होता हैं उन्हें पोस्ट टर्म बर्थ कहा जाता है।

लेबर पेन क्या है – labour pain kya hota hai

लेबर पेन (प्रसव) महिलाओं को तब होता है जब शिशु का जन्म होने वाला होता है लगभग 32 से 33 सप्ताह के बाद से शिशु बर्थ पोजीशन में (सिर नीचे पैर ऊपर) आने लगता है जिसके बाद शिशु का जन्म होता है लेबर पेन होने पर महिला को तुरंत hospital के लिए रवाना हो जाना चाहिए

FAQ. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट में बच्चा कैसे होता हैं – baccha kaise hota hai

जब महिला कंसीव कर लेती है मतलब गर्भधारण हो जाता है तब पेट में बच्चा आता है।

शादी के बाद प्रेगनेंसी कैसे होती हैं

शादी के यदि पति पत्नी शारीरिक संबंध बनाते है अर्थात असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करते है तब महिला प्रेग्नेंट हो जाती है

शादी के बाद फैमिली प्लानिंग कैसे करें – how to do family planning after marriage

यदि पति पत्नी, शारीरिक और मानसिक दोनो रूपो से शादी के लिए तैयार नहीं तब उन्हे फैमिली प्लानिंग नहीं करनी चाहिए। यदि महिला नाबालिग हैं तब भी ऐसा ना करें। महिला 18 से अधिक और पुरूष 21 तब फैमिली प्लानिंग कर सकते हैं

बच्चा कहां से पैदा होता हैं – bachha kahan se paida hota hai

बच्चा माता के गर्भ से पैदा होता है माता के गर्भ में शिशु 9 महीनों तक विकसित होता जिसके बाद उसका जन्म होता हैं।

प्रसव किसे कहते है – prasav kise kehte hai

प्रसव जिसे लेबर पेन भी कहा जाता है यह महिला को तब होता जब शिशु का जन्म होने वाला होता है।

प्रेगनेंट कैसे किया जाता हैं – pregnant kaise kiya jaata hai

असुरक्षित यौन संबंध बनाने से महिला प्रेगनेंट होती है, खासकर यदि महिला का ओव्यूलेशन चल रहा है तो प्रेगनेंट होने की ज्यादा संभावना रहती हैं।

दूसरा बच्चा कब पैदा करना चाहिए ? दूसरा बेबी कब करें – tips to plan second baby in hindi

यदि कोई पती पत्नी दूसरा बच्चा चाहते है तो उन्हें कम से कम एक साल का समय देना चाहिए, जिससे बच्चा स्वस्थ और सुडौल रहता है।

Hindiram के कुछ शब्द

बच्चा कैसे पैदा होता हैं -shadi ke baad baccha kaise hota hai, वैसे तो इसे समझने में आपको ज्यादा दिक्कत नहीं होगी अगर आप जन जाए baby kaise banta hai तब आप इसे आसानी से समझ सकते है

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