Kapde kitne prakar ke hote hai in hindi | कपड़ों के कितने प्रकार होते हैं

कपड़ों के प्रकार और उनका महत्व, मानव जीवन शैली की अनोखी पहचान रही। जब इंसान गुफाओं में रहा, उसने पेड़ के पत्तों, जानवरों की खालों को कपड़ों के प्रकार स्वरूप धारण किया।
परंतु मानव सभ्यता प्रगति होने से – रहने, खाने-पीने, और पहनावे में अत्यधिक परिवर्तन आया। हमारा पहनावा जो सीमित रहा, वह आज अनेक रूपों मैं दिखाई देता, आज हमने “प्राकृतिक फाइबर” एवं ”सिंथेटिक फाइबर” (जो कि मानव निर्मित) को अपने जीवन शैली के अनुकूल बना लिया।

लेकिन कपड़े के प्रकार ( kapde ke prakar ) – जिन फाइबरस का प्रयोग हम करते, हम पर अनेकों प्रभाव डालते हैं…

कपड़ों के प्रकार कितने होते हैं – Kapde kitne prakar ke hote hai in hindi

कपड़ों-के-कितने-प्रकार-होते-हैं

सिल्क, लिनन, कॉटन आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले कपड़े के प्रकार है। इसके अलावा खादी, ऊनी, रेशमी,  कश्मीरी, मलमल, ब्रोकेड, ग्रॉजेट, स्पैंडेस्क, पॉलिस्टर, लाइक्रा, रेयान, विस्कोस जैसे कपड़े शामिल है।

लेकिन इन वस्त्रों को बनाने के लिए फाइबर्स का उपयोग किया जाता है। जो कुछ इस तरह है – (i)नेचुरल फाइबर, (ii)सिंथेटिक फाइबर, और (iii)पॉली सिंथेटिक फाइबर इन्हीं फाइबर की मदद से अलग अलग धागे के प्रकार बनाए जाते है

नेचुरल फाइबर  (Natural fibre)

नेचुरल प्रकार के कपड़े प्राकृतिक रूप से- पेड़ पौधों जीव जंतु से प्राप्त होता, ये बिलकुल शुद्ध रहते। यदि बात करे इनसे होने वाले दुष्प्रभावों की, कुछ लोगो को जीव-जंतुओं से मिले फाइबर द्वारा निर्मित वस्त्र से एलर्जी वाले लक्षण उभर आते है। लेकिन यह कहना “कपड़े उचित नहीं ” सही नहीं होगा। चूंकि हम इसे सीधे प्रकृति से लेकर उपयोग लाते, इसकी गुणवत्ता बनी रहती है

उदाहरण:  कॉटन, सूती, रेशम

विशेषता

  1. कपड़े सामाग्री हेतु उपयोगी
  2. खाद्य सामाग्री हेतु उपयोगी
  3. नीवासिय सामग्री हेतु उपयोगी
  4. चिकित्सीय सामाग्री हेतु उपयोगी
  5. उद्योग समग्री हेतु उपयोगी

सिंथेटिक फाइबर्स (Synthetic fibre)

सिंथेटिक फाइबर के कपड़े कृत्रिम उत्पाद माने जाते, हम इसे प्रकृति से नहीं प्राप्त कर सकते, इन्हें मानवों द्वारा रासायनिक अभिक्रियाओं (जिसमें विभिन्न रसायनों को मिलाते) के द्वारा निर्मित किया जाता, इन्हें बनाए जाने वाले रसायन मानव जीवन के लिए घातक होते, अत: इस मिश्रण का उत्पाद हानि पहुंचाने में सक्षम रहता हैं।

उदाहरण: नायलॉन, पॉलिस्टर, नेट

विशेषता

  1. अलग अलग गुणवत्ता वाले फाइबर के लिए
  2. कृत्रिम होने की वजह से कभी भी निर्मित कर उपयोग
  3. इन्हें नेचुरल फाइबर का बेहतर विकल्प रूप मानना
  4. सीमित समय पर अधिक रूप में निर्मित होना
  5. ये किफायती और मजबूत

पॉली सिंथेटिक (Poly synthetic fibre)

  इन्हें सेमी सिंथेटिक वस्त्र फाइबर्स की संज्ञा दी गई, जो एक मिश्रित प्राकृतिक वाला कपड़ा फाइबर हैं यह दोनों फाइबर “नेचुरल “और “सिंथेटिक ” का मिश्रित वस्त्र प्रकार है अतः इसमें दोनों के गुण पर्याप्त रूप से समाहित रहते। हालांकि, यह मिलाए गए फाइबर अनुपात पर भी निर्भर करता। मिश्रित होना अलग-अलग गुणवत्ता वाले कपड़े निर्माण का कारण बनते हैं।

उदाहरण: रीयान, गोर्जट, ब्रोकेड

विशेषता

  1. फेब्रिको में परिधान का महत्व बढ़ाते
  2. खाद्य संरक्षण हेतु उपयोगी
  3. उद्योगों में नेचुरल फाइबर विकल्प रूप से प्रयोग
  4. खेती कार्य उपयोगी
  5. चिकित्सा क्षेत्र उपयोगी

अभी तक हमने जाना… कपड़े में उपयोग किए जाने वाले फाइबर् की पहचान क्या तथा इन्हें कहा से प्राप्त किया जाता है?

लेकिन…सबसे महत्वपूर्ण जानकारी तो आपने ली नहीं !आखिर कपड़े के प्रकार कितने होते हैं? जो हम दिनचर्या में उपयोग करते…

विभिन्न कपड़ों के प्रकार

कॉटन(cotton)

से बने कपड़ा सूती वस्त्र कहलाता यह प्रकृति रूप से कपास पौधे से प्राप्त तथा इसका वानस्पतिक नाम “गॉसीपियम हर्बेसियम” है। कॉटन हमें कापस पौधों पर लगने वाले बीज संरक्षण (बीज के अंदर) से प्राप्त हुआ। जैसे ही यह पूरी तरह विकसित होते, कॉटन बीज से बाहर निकलने लगे, इसे कॉटन का कपड़ा निर्माण हेतु ले लिया जाता।

विशेषता

  • इससे बने कपड़े मुलायम रहते
  • कॉटन का वजन हल्का रहता
  • यह अवशोषित अधिक करता
  • इसमें सिलवटे जल्दी पढ़ती
  • इससे बने कपड़े शरीर की नामी बनाए रखते

सिल्क(silk)

के कपड़े रेशम कहलाते, इन कपड़ों को रेशम कीड़े द्वारा बनाए कोकून से प्राप्त जो मुख्यत: प्रोटीन से बना रेशा है। इसका उपयोग रेशम धागे बनाने में होता, रेशम मुख्य रूप से चार प्रकार के होते है – मूंगा रेशम, मलवरी रेशम, टसर रेशम, अंडि रेशम हालांकि इसके अलावा अन्य रेशम प्रकार पाए गए। लेकिन सबसे बेस्ट रेशम शहतूत पत्तों पर पलने वाले रेशम कीट के लारवा द्वारा बनाया जाता है

विशेषता

  • सिल्क से बने कपड़े चमकदार अर्थात चमकीले रहते
  • इससे बने कपड़े लचकदार होते
  • इसमें सिलवटें जल्दी नहीं आती
  • यह किसी भी आकार में ढाला जाता
  • इसे विशेष अवसरों पर पहनते

लिनन(linen)

रेशे अलसी पौधे (flex) से प्राप्त किए जाते हैं। अगर बात करें लिनन के इतिहास की यह हजारों सालों से उपयोग में लाया जाता रहा, जिसका प्रमाण दक्षिणी यूरोपिय गुफाओं से मिले सबूत, इसलिए इसे 30,000 वर्ष पूर्व से उपयोग किए जाने की बात प्रचलित है। इन फाब्रिको को सोखने की अदभुत प्रतिभा मिली लेकिन यह अपना कलर जल्दी छोड़ देती है।

विशेषता

  • लिनन के कपड़े मजबूत होते
  • लिनन कपड़े पानी सोख फैल देते
  • लिनन जल्दी सुख जाता
  • गर्मी में अधिक उपयोगी
  • लिनन कपड़े पर सिलवटें जल्दी नहीं पड़ती

ऊनी(wollen)

कपड़े के प्रकार – जंतुओं से मिले फैब्रिक से बनाया जाता। ऊन का फैब्रिक (wollen) भेड़, बकरियों के बालों से निर्मित होता है। सर्वप्रथम इनके बालों से गन्दगी हटाने हेतु धोते, फिर मशीन की सहायता से सुखाकर रेशे का निर्माण किया जाता। इससे बने धागे मुख्यता मोटे आकार का मिलते जिनका उपयोग उपयोग सर्दियों में ठंड से बचाव हेतु किया जाता है।

विशेषता

  • ऊन हाइपोएलर्जिक अर्थात इनसे एलर्जी का खतरा रहता
  • ऊनी कपड़े का वजन भारी रहता
  • ऊन नमी जल्दी सोखता
  • यह ऊष्मा आर पार नहीं होने देता
  • ठंड के लिए अनुकूल रहता

लाइक्रा(lycra)

स्पंडेक्स और एलास्टेन जैसे प्रकार वाले फैब्रिको को सिंथेटिक उत्पाद माने जाते, अर्थात इन सभी को रसायनों का उपयोग कर निर्मित किया जाता। इसे पहली बार 1958 के दशक, रसायन शास्त्री “जोशेप शिवस” द्वारा बनाया था। जहां ये अपने expand अर्थात खीचाव वाले गुण के लिए प्रख्यत हो गया। खिंचाव पड़ने पर यह रबर की तरह फैल और छोड़ने पर अपनी पूर्व अवस्था पर आ जाता है।

विशेषता

  • लाइक्रा से बने कपड़े लचीले होते
  • लाइक्रा खीचाव पढ़ने पर आकार बड़ा तथा घटा लेता
  • लाइक्रा पॉलीइथर पोलीयूरिया कॉप्लिमर से बनाया जाता
  • लाइक्रा सामान्य से 6 गुना अधिक लंबा हो सकता
  • लाइक्रा से गारमेंट कपड़े़े बनाए जाते

ब्रोकेड(brocade) 

अलग-अलग रंगों वाले सिल्क फैब्रिक (धागों) से बुनकर बनाता जो राज्यसी लुक देता है। सजावट के लिए कपड़ों पर गोल्डन या सिल्वर धागों का प्रयोग इनकी खूबसूरती और बढ़ा देती, इन्हें अक्सर घरो की सजावट में अधिक उपयोग किए जाते, लेकिन इन्हें फॉर्मल वियर की तरह भी पहना जाता है।

विशेषता

  • यह सोफे, बेड, आदि सजावटीय कार्य उपयोगी
  • डिजाइनिंग के लिए विभिन्न प्रकार के रंगों वाले धागों से बुना जाता
  • कपड़ों पर रिचलुक होता
  • इसे ईवनिंग ड्रेस रूप में भी पहनते
  • बनारसी साड़ियों में भी ब्रोकेड उपयोगी

क्रेप(crepe)

इसे क्रीप और क्रैप कहकर भी पुकारा जाता है। क्रीप का फैब्रिक सिल्क, ऊन, और सिंथेटिक फाइबर को मिलाकर बनाया जाता है। परंतु इसे अन्य फाइबर की मदद से भी बना सकते जो मजबूत भी रहता हैं। क्रीप वस्त्र के प्रकार निर्भर रहते – पतला होने पर ये हल्का और मोटा होने पर भारी हो जाते।

विशेषता

  • इवनिंग गाउन में क्रीप उपयोगी रहता
  • घर की सजावट के लिए उपयोगी होता
  • क्रीप का प्रकार, फाइबर और निर्माण विधि पर निर्भर होता
  • इसका सिलवट वाला लुक इसे अलग दिखाता
  • इनसे अन्य तरह के कपड़े भी बनाए जाते – जैसे ड्रेस, सूट, ब्लाउज

रायोंन(rayon)

रायोंन प्राकृतिक पदार्थों से बना कृत्रिम उत्पाद है। इसे बनाने के लिए लकड़ियों के गुदो को रसायनों से मिलाते फिर मशीन कि सहायता से धागों का निर्माण किया जाता।

विशेषता

  • लकड़ी से बने होने पर धागे मजबूत नहीं होते।
  • रायोंन मुलायम और मखमली रहते
  • रायोंन छूने पर रुई की तरह रहता
  • रायोंन रीजेनरेटेड सेल्यूलोज फाइबर से बनता
  • इसमें अवशोषण गुण अधिक रहते

ग्रोर्जेट(groget)

यह शुद्ध सिल्क से बना क्रीप फैब्रिक हैं। लेकिन इसे सिंथेटिक फाइबर जैसे रियान से भी बनाया जा सकता है। इससे बने कपड़े उन महिलाओं के लिए बेस्ट रहेगा, जिन्हें सॉफ्ट, खुरदुरी लेकिन आरामदायक कपड़ा चाहिए। इसे हर मौसम में पहना जा सकता

विशेषता

  • ग्रोर्जेट कपड़े खुरदुरे रहते
  • इन्हें किसी भी मौसम में पहन सकते
  • धोने से सिकुड़ने लगता
  • ग्रोर्जेट कपड़े मजबूत होते
  • इसमें रंग जाने की समस्या रहती


मलमल (वेलवेट)

मलमल कपड़ों को बनाने के तरीके बहुत होते, लेकिन सबसे उत्तम क्वालिटी का मलमल कपड़ा, शुद्ध सिल्क धागों से बनता, हालांकि शुद्ध सिल्क से मलमल कपड़े बहुत कम मात्रा में बनते तथा इनकी कीमत भी अधिक होती, इसलिए मलमल वस्त्र नाम पर सिंथेटिक वस्त्र परिधान का महत्व आज ज्यादा है।

विशेषता

  • मलमल कपड़े की पहचान सतह पर उठे रोए से
  • मलमल आरामदाई रहते
  • पुराने समय का राजाओं का मुख्य पोषक था।
  • छूने पर रूई सामान लगता
  • वजन भारी रहता

पॉली कॉटन(poly cotton)

कपड़े का निर्माण, कॉटन में कुछ मात्रा सिंथेटिक फाइबर्स मिलाकर की जाती, जो सामान्य कॉटन से भिन्न, अधिक मजबूत और टिकाऊ रहता। पॉलिस्टर को कॉटन से मिला कर विभिन्न प्रकार के कपड़े बनाए जाते। हालांकि इनमें अन्य फाइबरो के प्रकार का प्रयोग भी होता है।

विशेषता

  • शुद्ध कॉटन की तुलना से मजबूत
  • सिलवटें कम बनती
  • टिकाऊ रहता
  • कॉटन की गुणवत्ता कम हो जाती
  • पॉली कॉटन की गुणवत्ता सिंथेटिक फाइबर अनुपात पर निर्भर रहता

वैसे तो कपड़ो के प्रकार kapde ke prakar में सबसे अच्छा कपड़ा कौन सा हैं? बता पाना मुश्किल होगा! पर समन्यत: उपयोग किए जाने वाले वस्त्रों के प्रकार और फाइबर ऊपर अंकित है।

अगर आपको कपड़ों के प्रकार से संबंधित अधिक जानकारी की जरूरत है तो हमारे website के मुख्य पृष्ठ पर आए, यहां आपको कपड़ों से जुड़ी सभी जानकारीया प्रप्त होगी।

धन्यवाद

Share on:

Leave a Comment